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सोसाइटी ऑफ रियोलॉजी के फेलो की उपलब्धि पाने वाले पहले भारतीय बने IIT Kanpur के प्रोफेसर योगेश एम जोशी

Rheology Fellowship 2022 IIT कानपुर के Chemical Engineering डिपार्टमेंट के प्रोफेसर योगेश एम जोशी को सोसाइटी ऑफ रियोलॉजी 2022 के फेलो में से एक के रूप में चुन लिया गया है। वह इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय हैं।

सोसाइटी ऑफ रियोलॉजी के फेलो की उपलब्धि पाने वाले पहले भारतीय बने iit kanpur के प्रोफेसर योगेश एम जोशी
Source: Google

सोसाइटी ऑफ रियोलॉजी फैलोशिप एक प्रतिष्ठित स्टेटस है, जो बताता है कि चुना गया व्यक्ति एक विशिष्ट वैज्ञानिक उपलब्धि और एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल करने वाला है, साथ ही रियोलॉजी के क्षेत्र में स्कॉलरशिप हासिल करने का इतिहास है।

वह ‘समाज की सेवा’ और सोसाइटी ऑफ रियोलॉजी के सदस्य के रूप में काम से काम 8 साल की अवधि को भी ध्यान रखता है, हर साल केवल 0.5% मेंबर्स को ही ये फेलोशिप मिल पाती है।

IIT कानपुर के डायरेक्टर प्रोफेसर अभय करंदीकर ने कहा कि, मैं प्रोफेसर योगेश जोशी को वर्ष 2022 के लिए सोसायटी ऑफ रियोलॉजी के फेलो में से एक के रूप में चुने जाने के लिए बधाई देता हूं, यह वास्तव में संस्थान के लिए बहुत गर्व की बात है।

उन्होंनेये भी कहा, ‘इससे IIT कानपुर के रिसर्च और इनोवेशन इकोसिस्टम को फायदा पहुंचेगा, ये साइंस और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बेहतर करने के लिए प्रयास जारी रखने के लिए संस्थान में सभी की भावना को बढ़ाएगा।

प्रोफेसर योगेश एम जोशी के बारे में

1996 में पुणे यूनिवर्सिटी से पॉलिमर इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। 2001 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे से केमिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की। डॉक्टोरल स्टडी नेशनल केमिकल लेबोरेटरी से की, जबकि पोस्ट डॉक्टोरल स्टडी के लिए वह अमेरिका चले गए।

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2004 में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में शामिल हुए। वर्तमान में IIT कानपुर में पंडित गिरीश और सुषमा रानी पाठक के अध्यक्ष हैं।

जोशी जी को मिल चुके है कई पुरस्कार

2015 में भारत सरकार द्वारा इंजीनियरिंग साइंस में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार मिला।

2016 में इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के फेलो के रूप चुने गए।

2017 में नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, भारत के फेलो के रूप में चुने गए।

2019 में DRDO द्वारा अकादमी उत्कृष्टता पुरस्कार मिला।

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