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राजस्थान के भीलवाड़ा में मौजूद देवनारायण मंदिर, जो पिछले 45 सालों से है बंद जाने क्यों

भारत देश में हिन्दू मंदिरों पर विवाद और पाबंदी का होना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन यह एक चौकाने वाली बात है कि इस देश में जहां हिन्दू की संख्या सबसे ज्यादा हैं वहां उन्हें उनके ही देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने की इजाजत नहीं मिल रही है।

Rajasthan के भीलवाड़ा में मौजूद देवनारायण मंदिर की जो कि पिछले 45 सालों से बंद पड़ा है, बहुत से लोगों को इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं होगी, लेकिन आज देवनारायण मंदिर का पूरा इतिहास आपके सामने पेश है।

राजस्थान के भीलवाड़ा में मौजूद देवनारायण मंदिर, जो पिछले 45 सालों से है बंद जाने क्यों
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भीलवाड़ा के लोग, Rajasthan Govt और प्रशासन ने दोबारा मंदिर के पट को खोलने और सालों से बिना पूजा-अर्चना के विराजी भगवान की प्रतिमा की आराधना करने की मांग उठाई है। मंदिर खुलवाने को लेकर बीते दिन मांडल कस्बे के लोगों ने 17 किलोमीटर लम्बा मार्च निकाला और सरकार तथा प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।

11 मार्च को मांडल में गोपाल सिंह गुर्जर बस्सी ने 45 साल से बंद पड़े देवनारायण मंदिर के ताले को भी तोड़ दिया और प्रशासन को खुली चुनौती दी गई थी, इसके बाद गोपाल सिंह गुर्जर के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भड़काने के साथ अदालत की अवमानना करने के भी आरोप लगा दिए गए हैं।

क्यों किया गया है देवनारायण मंदिर को बंद

1977 से देवनारायण मंदिर की जमीन का विवाद Court में लंबित है ठीक वैसे ही जैसे अयोध्या की राम जन्म भूमि और मथुरा की कृष्ण जन्म भूमि। इस देवनारायण मंदिर का केस जब कोर्ट में गया था तो न्यायालय ने मंदिर के दरवाजे में ताला लगाने के बाद चाबी को थाने में जमा करा दी थी।

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राजस्थान के भीलवाड़ा में मौजूद देवनारायण मंदिर, जो पिछले 45 सालों से है बंद जाने क्यों
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Devnarayan Temple में भगवान देवनारायण की प्रतिमा विराजमान है, वह राजस्थान के लोक देवता माने जाते हैं और उन्हें भगवान विष्णु का अवतार कहा जाता है। वह राज्य के शासक और एक महान योद्धा हुआ करते थे। देवनारायण ने 8 वीं शताब्दी में अजमेर में अपना शासन किया था और देश में अरबो को घुसपैठ करने से उनका प्रतिरोध किया था।

भगवान देवनयारण की गुर्जर समाज पूजा करता है, क्योंकि उन्होंने अपने पराक्रम से अत्याचारी विदेशी शासकों से खूब लड़ाइयां लड़ी थीं और उन्हें पराजित किया था। देवनारायण गोवंश के रक्षक थे, वह हर दिन उठने के बाद गौ दर्शन करते थे, उनके पास 98000 गोवंश थे।

क्या था देवनारायण मंदिर का इतिहास

जानकारी के अनुसार जिस स्थान में देवनारायण का ऐतिहासिक मंदिर बना है उस जमीन का कुछ भूखंड मुसलमानों का है, इसका दावा क्षेत्रीय मुसलमानों द्वारा कोर्ट में किया गया था।

अब कोर्ट को तो सबूत चाहिए, जो नहीं मिलने पर कोर्ट ने मंदिर में ताला लगवा दिया और 45 सालों से देवनारायण मंदिर में किसी भी प्रकार की पूजा-अर्चना नहीं हुई। लेकिन हर साल मंदिर के परिसर में मेला का आयोजन किया जाता है। जमीनी विवाद के कारण भगवान विष्णु के अवतार देवनारायण का मंदिर आज तक बंद है।

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